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संगठन और प्रबंधन के महारथी थे अहमद पटेल

कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल का आज सुबह निधन हो गया। वह कोरना से संक्रमित थे। कांग्रेस में अहमद पटेल के होने की अहमियत को हमेशा समझा गया। सियासी हलकों में यह बात कभी छिपी नहीं रही कि कांग्रेस में वह एक महत्वपूर्ण धूरी थे। लंबे समय से वह गांधी परिवार के सबसे अहम सलाहकार थे। खासकर 2001 के बाद वह सोनिया गांधी के सलाहकार के तौर पर उन्होंने अहम मसलों पर अपना योगदान दिया। भारतीय राजनीति के इतिहास में 2004 और 2009 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस को विजय दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। खासकर एनडीए के शाइनिंग इडिंया के पलटवार में कांग्रेस की अहम रणनीति बनाने में अहमद पटेल को भी श्रेय जाता है। अहमद पटेल का योगदान इस मायने में भी है कि कांग्रेस के अंदर जब भी संगठन स्तर पर कहीं किसी तरह की उथल पुथल हुई तो अहमद पटेल ने उसे कुशलता से संभाला। कांग्रेस में उनकी अहमियत इसी बात से समझी गई कि राज्यों से दिल्ली की दिल्ली की दौड लगाने वाले कांग्रेसी अहमद पटेल से मिलना कभी नहीं भूले ।

अहमद पटेल को संगठन के प्रबंधन में महारथ थी। हालांकि वह जन नेता के तौर पर नहीं जाने गए। आम जन से उनका सीधा संवाद नहीं होता था लेकिन कांग्रेस के अंदर उनकी हैसियत का अहसास सियासी हलकों के लिए नई बात नहीं थी।अहमद पटेल 21 अगस्त 1949 को गुजरात के भरूच में जन्में थे। पटेल ने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत नगरपालिका के चुनाव से की थी,बाद में अहमद पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए। आपातकाल के बाद जनता पार्टी की लहर में भी अहमद पटेल भरुच से चुनाव जीत कर आए। 26 साल का युवा संसद में पहुंचा था। राजनीतिक कैरियर में अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सभा सांसद बने और पांच बार राज्यसभा सांसद(1993,1999, 2005, 2011, 2017 वर्तमान) रहे हैं, अहमद पटेल की शादी 1976 में मेमूना अहमद से हुई।अहमद पटेल की एक बेटा और एक बेटी है।राजनीति मे एक बडी हैसियत रखने के बावजूद अहमद पटेल मीडिया के सामने आने से बचते थे। लेकिन मीडिया इस बात को समझता था कि कांग्रेस के अहम फैसलों मे उनकी क्या भूमिका होती थी। इसलिए आज के दौर में उन्हे कांग्रेस का चाणक्य भी कहा जाने लगा था। एक तरह से काग्रेस का रिमोट उनके हाथ में रहता था। सबसे अहम बात यह है कि वह गांधी परिवार के सबसे विस्वसनीय नेताओ में थे। ऐसे समय जब कांग्रेस आंतरिक कमजोरियो से गुजर रही है और उसके पराजय का दौर है अहमद पटेल का जाना बहुत बडी क्षति है।

अहमद पटेल इंदिरा गांधी से लेकर प्रियंका गांधी के दौर तक कांग्रेस में सक्रिय रहे। उन्हे संगठन के कामकाजो से लगाव था। 1977 में वह 26 साल की उम्र में सांसद बन गए थे और युवा कांग्रेस अध्यक्ष बने। 1980 में जब इंदिराजी प्रधानमंत्री बनी तो अहमद पटेल को अपने मंत्रिमंडल में लेना चाहती थीं लेकिन अहमद पटेल ने संगठन में रहने की इच्छा जताई। इसी तरह राजीब गांधी भी उन्हें अपने मंत्रिमंडल में रखना चाहते थे लेकिन उन्हें संगठन की जिम्मेदारी संभाली। वह राजीव गांधी के संसदीय सचिव बने। तीन बार लोक सभा और चार बार लोकसभा के सदस्य रहे। वह कांग्रेस के अहम रणनीतिकार बने रहे। वह राजनीति की बिसात बिछाने में माहिर थे। कई बार उन्होने कांग्रेस को भंवर से निकालने में योगदान दिया। कांग्रेसियों के आपसी मतभेद भी अहमद पटेल के आवास पर निपटते थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की टिप्पणी महत्व रखती है कि अहमद पटेल कांग्रेसियों के लिए हर मर्ज की दवा थे।

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