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उत्तराखंड समाचार

पेयजल के लिए तरसते ग्रामीण और विभागीय सुस्ती !

700 से अधिक जनसंख्या और 95% गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले,ग्राम पंचायत घाईखाल के राजस्व ग्राम घाईखाल सिग्गड़ी में गंभीर पेयजल संकट पैदा हो गया है।

ग्राम पंचायत घाईखाल के राजस्व ग्राम घाईखाल और सिग्गड़ी विगत कई वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीण 3-4 किमी दूर डिफेडा गधेरे और हेंवल नदी से खच्चरों और सिर पर पानी ढोने को विवश हैं। घाईखाल की पेयजल योजना 35 साल पुरानी है और विभागीय सुस्ती के चलते अत्यधिक जीर्णशीर्ण स्थिति में है।
विधानसभा चुनावों से पहले जहां विभागों की कार्यप्रणाली चुस्त और त्वरित होनी चाहिए, वहीं पेयजल जैंसे जन संवेदनशील मुद्दे को लेकर विभागीय लापरवाही कई प्रश्न खड़े करता है।
ग्राम प्रधान चंद्रमोहन रौठाण द्वारा लेखन अड्डा गढ़वाल संवाददाता राजीव " गढवाल" को जानकारी दी गई कि उनके द्वारा अपने निजी स्रोत से काफी पैसे व्यय किए गए,पंरतु पानी अभी भी घाईखाल तक नहीं पहुंच पाया है।
वहीं ग्राम सिग्गडी के पेयजल लाईन शिशाखोली की मरम्मत त्याडो माता के सहयोग और ग्राम पंचायत निधि से किया गया था,जो कि स्रोत के सूख जाने से सफल नहीं रहा।
विषम परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण लम्बे समय से हेंवल नदी से पपिंग योजना के निर्माण की मांग भी सरकार से कर रहे हैं,जिस पर अभी तक कोई सकारात्मक कारवाई नहीं हुई है। ग्रामीण परंदा पपिंग योजना की तर्ज पर इस क्षेत्र के लिए एक सामूहिक योजना की मांग कर रहे हैं,जिससे कई अन्य ग्राम सभाओं की पेयजल की समस्या दूर हो सके। यह विभागीय सुस्ती और जन भावनाओं के प्रति घोर उदासीनता ही है  कि "घर घर जल मिशन"के अंतर्गत अभी तक इस ग्राम सभा में जल मिशन के अंतर्गत प्रथम चरण का कार्य तक नहीं किया गया है।ग्रामीणों के अनुसार विभागीय अधिकारियों से इस विषय में कई बार अनुरोध किया गया है,लेकिन विभाग द्वारा चुप्पी साध रखी है। विभाग से उक्त परक्रण पर अपडेट मिलने पर जवाब जल्द ही प्रकाशित किया जाएगा।

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