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उत्तराखंड समाचार

बिखरी यमकेश्वर भाजपा का सीधा फायदा किसे ? कांग्रेस या निर्दलीय ,कौन तोड़ सकता है भाजपा का अभेद दुर्ग ?

यमकेश्वर,पौड़ी गढ़वाल।

यमकेश्वर पौड़ी गढ़वाल की एक प्रमुख विधानसभा सीट है, जिसने उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद से प्रदेश को कैबिनेट मंत्री,उपाध्यक्ष विधानसभा, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग,प्रदेश अध्यक्ष(महिला मोर्चा) सहित उत्तराखंड राज्य के कई सम्मानित नीति निर्माता, राजनैतिक,
संवैधानिक पदों आदि पर आसीन राजनीतिज्ञ दिये हैं। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व गोरखपुर सांसद श्री योगी आदित्यनाथ जी की जन्मस्थली भी (पंचुर, यमकेश्वर) यहीं रही है।
अविभाजित उत्तर प्रदेश में भी पर्वतीय विकास मंत्री और सांसद श्री चंद्रमोहन सिंह नेगी (ग्राम कांडी, यमकेश्वर) का सशक्त कार्यकाल रहा,जिस दौरान उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को लेकर अलख जलाने के साथ ही,यहां की जरूरतों को उस दौरान विधानसभा में कई बार उठाया था।
मुख्य दलों में यमकेश्वर में भाजपा और कांग्रेस ही मुख्य तौर पर प्रभावी हैं,जबकि अन्य क्षेत्रीय/राजनीतिक दलों में उत्तराखंड क्रांति दल(यूकेडी) भी वर्चस्व बचाने की कोशिशों में सदैव तत्पर रहा है।
यहां मुख्य चुनावी द्वंद उत्तराखंड राज्य स्थापना से भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है। राज्य निर्माण के प्रथम चुनाव,वर्ष 2002 में जहां भाजपा के पैनल से तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष विजय बर्थवाल और जिला पंचायत सदस्य विजय लखेड़ा का नाम केंद्रीय पैनल में गया और बाजी विजय बर्थवाल के हाथ लगी,वहीं कांग्रेस की ओर से सरोजिनी कैंतुरा प्रत्याशी बनीं। प्रथम विधानसभा चुनाव काफी निर्णायक साबित हुए। विजय बर्थवाल ने प्रथम विधानसभा में प्रवेश करने के साथ ही दो अन्य कार्यकाल अपने नाम किए, जिनमें वे क्रमशः 2007 और 2012 में चुनाव जीतकर,राज्य विधानसभा में प्रवेश करके यहां से पहली कैबिनेट(उत्तराखण्ड) में मंत्री बनीं।
 2017 विधान सभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिट.) बीसी खंडूरी की सुपुत्री ऋतु खंडूरी भूषण को भाजपा ने तत्कालीन विधायक विजय बर्थवाल का टिकट काटकर,अपना प्रत्याशी बनाया,वहीं कांग्रेस में दो फाड़ होते हुए एक पक्ष पूर्व विधायक कोटद्वार शैलेंद्र रावत के खेमे में जुड़ गया,वहीं दूसरा पक्ष कांग्रेस से बागी निर्दलीय रेणु बिष्ट से जुड़ गया। कांग्रेस की आंतरिक कलह का फायदा पुनः भाजपा को मिला,जिसमें भाजपा प्रत्याशी ने विजय दर्ज की। तत्पश्चात् विधायक ऋतु खंडूरी भूषण को भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष का पद भी मिला।
वर्ष 2022,कांग्रेस द्वारा भेजे गए पैनल में जहां पूर्व कोटद्वार विधायक शैलेंद्र रावत और द्वारीखाल ब्लॉक प्रमुख महेंद्र राणा,रुचि कैंतुरा का नाम प्रमुख हैं, वहीं भाजपा खेमे से वर्तमान विधायक ऋतु खंडूरी भूषण, पूर्व विधायक विजय बर्थवाल,पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय लखेड़ा और पूर्व राज्यमंत्री महाबीरप्रसाद कुकरेती का नाम वरीयता में होने की खबरें हैं।
विगत विधान सभा चुनावों के उलट,इस बार भाजपा से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। जहां वर्तमान विधायक ऋतु खंडूरी भूषण को टिकट दिए जाने की स्थिति में सीट जीतने की स्थिति को लेकर भाजपा संशय में है,वहीं पार्टी में अंतर्कलह खुल कर सामने आने की सम्भावनायें प्रबल हो सकती हैं।शैलेंद्र रावत द्वारा  कोटद्वार में चुनाव लड़ने की स्थिति में,कांग्रेस द्वारा महेंद्र राणा को पार्टी प्रत्याशी बनाये जाने की संभावना हो सकती है ! हालांकि वर्तमान समय में भाजपा के संशय का सीधा फायदा शैलेंद्र रावत को मिल सकता है,अगर वे यमकेश्वर में कांग्रेस के सिपहसालार बने रहते हैं। अभी तक के जमीनी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट है कि यमकेश्वर विधानसभा परिर्वतन की ओर बढ़ सकती है और चुनाव के उपरान्त परिणाम काफी चौंकाने वाले हो सकते हैं। राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों के अलावा भी निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं और राष्ट्रीय दलों का खेल खराब कर सकते हैं !
भाजपा यमकेश्वर संगठन की दृष्टि से काफी कमजोर प्रतीत हो रहा है,जिसमें पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता,पार्टी के (क्षेत्रीय) नेतृत्व , वर्तमान विधायक की जमीनी जुड़ाव की कमी,कार्यकर्ताओं को तवज्जों न देना और क्षेत्रीय प्रत्याशी के अभाव में दूर हटता जा रहा है।वहीं भाजपा कैडर वोट बड़े बिखराव की ओर बढ़ता दिख रहा है,जिसका सीधा प्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है कांग्रेस संगठन को। भाजपा के अटूट गढ़ में महेंद्र राणा सहित शैलेंद्र रावत ने सेंधमारी करते हुए क्षेत्र के कई लोगों को कांग्रेस से जोड़ते हुए उन्हें कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई है।कांग्रेस संगठन की दृष्टि से ज्यादा परिपक्व और प्रभावी दिख रही है,जिसमें कांग्रेस पार्टी द्वारा ग्रामीण परिवेश के लोगों को पार्टी में जोड़ना और जनता से सीधा संवाद प्रमुख है। चूंकि कांग्रेस में दावेदारों की संख्या सीमित है,उसे इसका लाभ मिलता दिख सकता है। चूंकि यमकेश्वर विधानसभा,भौगोलिक दृष्टि से मूलतः पहाड़ी भूभाग में स्थित है,यहां ग्रामीण आंचल का वोटर निर्णायक भूमिका में होता है,जिसमें वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस आगे रह सकती है। बरहहाल यह देखना जरूर रुचिकर होगा कि कांग्रेस को जनता से जुड़ने से कितना फायदा मिलता है और कांग्रेस वोट बैंक में कितनी वृद्धि होती है ?
वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों की बात करें,तो कांग्रेस भाजपा दोनों ही पार्टी के टिकट दावेदारों द्वारा विधानसभा क्षेत्र को अपनी संभावित दावेदारी के पोस्टर्स से सजाया गया है और उनके टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय लडने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता है ! 
वहीं एक मात्र क्षेत्रीय पार्टी यूकेडी द्वारा शांति प्रसाद भट्ट को उम्मीदवार घोषित किया गया है,जो क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं और विषमताओं को बखूबी जानते हैं और मीडिया तक पहुंचा पाते हैं,लेकिन अभी तक क्षेत्र की जनता तक अपनी विचारधारा नहीं पहुंचा पाएं हैं ! 

बरहहाल लोकतंत्र के इस महापर्व में इस वर्ष यह देखना दिलचस्प होगा कि यमकेश्वर में इस बार कौन सा राष्ट्रीय दल या क्षेत्रीय दल या निर्दलीय प्रत्याशी सत्ता हासिल करेगा और यमकेश्वर की ज्वलंत समस्याओं / मुद्दों को तत्परता से राज्य विधानसभा में उठाते हुए,रूठे रुके हुए विकास को गति देता है...

{ *विकास की सकारात्मक सम्भावना को कवि ने संवारा है*...सच झूठ की राजनीति को
इस बार इतिहास होते देखेंगे,
हर बार सिर्फ़ चुनावी वादे देखें हैं
इस बार विकास होते देखेंगे।}

आलेख आभार "राजीव गढ़वाल" और प्रदीप द्विवेदी

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