देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानो स्थित देश के पहले लेखक गांव में 25 अक्टूबर से अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। 25 से 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय महोत्सव में 60 देशों के हिंदीभाषी प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। साहित्य, भारतीय भाषाओं, संस्कृति, कला और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
महोत्सव की केंद्रीय थीम ‘भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’ रखी गई है। इसके अंतर्गत हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की संभावनाओं, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन तथा विश्व स्तर पर हिंदी के प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने पत्रकार वार्ता में आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने, उन्हें जागृत करने और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेखक गांव साहित्य, संस्कृति, कला और प्रकृति के जरिए देश-विदेश के सृजनशील लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है।
पांच दिवसीय महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों में साहित्य, समकालीन कला, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, भारतीय दर्शन और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं की भूमिका, शोध एवं नवाचार, मीडिया और डिजिटल संस्कृति तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय संवेदनाओं जैसे विषय भी शामिल हैं।
इसके साथ ही भारतीय साहित्य के वैश्विक प्रसार, अनुवाद, विदेशों में हिंदी शिक्षण और विभिन्न भाषायी एवं सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और भाषायी विरासत को बढ़ावा देने के लिए महोत्सव में हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में लोककला, लोकसाहित्य, प्रकृति, पर्यटन और युवा संवाद से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी। पुस्तक मेले और बाल सृजन उत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजन की जानकारी के अनुसार, महोत्सव का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन करेंगे, जबकि समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल होंगे। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के भी शामिल होने की संभावना है।
लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न देशों और पीढ़ियों के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना तथा भारतीय साहित्य एवं संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
लेखक गांव का यह अंतरराष्ट्रीय महोत्सव भारतीय भाषाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आयोजकों के अनुसार, इस पहल के जरिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आयोजित होने वाला यह महोत्सव साहित्यकारों, विद्यार्थियों, कलाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।
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