नई दिल्ली: बिना वैध वाहन बीमा (थर्ड पार्टी इंश्योरेंस) के सड़क पर वाहन चलाना आने वाले समय में और मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' मॉडल पर पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल और डीजल देने से पहले वाहन के वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की डिजिटल जांच की जाए। यदि वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है तो उसे ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और अनिवार्य वाहन बीमा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने चिंता जताई कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 56 प्रतिशत वाहन थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के बिना संचालित हो रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कोर्ट ने केवल 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' मॉडल ही नहीं, बल्कि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया है। इन कैमरों के जरिए बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर स्वतः ई-चालान जारी करने जैसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी और बीमा नियमों के प्रभावी अनुपालन से सड़क सुरक्षा में सुधार होगा। अदालत ने संबंधित एजेंसियों से पायलट प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार कर इसे लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने को कहा है। फिलहाल यह एक प्रस्तावित मॉडल है और इसके देशभर में लागू होने से पहले सरकार द्वारा पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।
0 Comments