केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को लेकर अहम प्रगति सामने आई है। योजना के तहत देश के 100 चिन्हित जिलों में कृषि विकास को गति देने के लिए अलग-अलग सरकारी योजनाओं को आपस में जोड़कर काम किया जा रहा है। सरकार का फोकस कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय और सुविधाओं में सुधार पर है।
योजना के तहत ऐसे जिलों को प्राथमिकता दी गई है जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण, टिकाऊ खेती, कृषि भंडारण और किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
योजना के तहत चिन्हित 100 जिलों के औसत प्रदर्शन स्कोर में भी सुधार दर्ज किया गया है। अप्रैल 2026 में इन जिलों का औसत स्कोर 22.54 था, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 38.85 हो गया। सरकार योजना की प्रगति को विभिन्न निर्धारित संकेतकों के आधार पर लगातार मॉनिटर कर रही है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं के बीच समन्वय किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाना और कृषि क्षेत्र में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभाव को एक साथ बढ़ाना है।
योजना के तहत किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विस्तार कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में आधुनिक कृषि तकनीक, टिकाऊ खेती और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों की जानकारी देकर उत्पादन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
सरकार की ओर से योजना की वित्तीय और जमीनी प्रगति की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अब योजना के तहत केवल धन के इस्तेमाल और गतिविधियों पर ही नहीं, बल्कि किसानों को वास्तविक रूप से मिले लाभ की भी निगरानी करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य पिछड़े कृषि जिलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना, किसानों की उत्पादकता बढ़ाना और कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
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