नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास प्रदर्शन किया। परिजनों ने मांग की कि मामले में कथित वीआईपी एंगल की जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनके प्रति समर्थन जताया। परिवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की अपील की।
अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
हालांकि, अंकिता के परिवार की ओर से मामले में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार ने दुष्यंत कुमार गौतम का नाम लेते हुए इस पहलू की जांच पूरी होने तक उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकने की मांग की है। ये आरोप हैं, जिन्हें जांच के निष्कर्ष या न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं ने परिवार की न्याय की मांग का समर्थन किया और मामले के कथित वीआईपी एंगल की जांच को लेकर सवाल उठाए।
परिवार का कहना है कि जब तक इस पहलू से जुड़े सवालों की जांच पूरी नहीं होती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड में भी राजनीतिक विरोध देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने देहरादून के गांधी पार्क में मौन उपवास कर नियुक्ति का विरोध किया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना उचित नहीं है। पार्टी ने मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नियुक्ति प्रभावी होने की तारीख उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से जुड़ी है।
इस नियुक्ति के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी एंगल को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। अब इस मामले में जांच की प्रगति और परिवार की मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
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