देहरादून जिले में एक सप्ताह के अंदर तीन महिलाओं की ताबड़तोड़ हत्या की वारदात के बाद सीएम धामी का यह भी कहना कि कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं”। अपने आप में गम्भीर स्थिति का खुलासा करने के लिए काफी है।
इससे पूर्व, सीएम धामी ने आईएएस अधिकारियों को उनकी लापरवाही के लिए चेताया था। यह वीडियो बहुत वायरल हुआ। शासन में बैठे अधिकारियों को कह दिया था कि वो जिसको जो काम सौंपते है, वह उन्हें याद रहता है।
दो सप्ताह पूर्व इस वॉयरल वीडियो के सन्देश को कितने आईएएस अधिकारियों ने जज्ब किया। यह तो पता नही लेकिन दो फरवरी को सीएम धामी यह कहकर सरकारी मशीनरी को बैकफुट पर धकेल दिया कि ,योजनाएं धरती पर दिखनी चाहिए।
उन अधिकारियों के लिए यह सन्देश व चेतावनी साफ है कि फील्ड में रिजल्ट नजर आए।
बीते एक महीने में कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने दिख रहे हैं। यूएसनगर जिले में किसान की आत्महत्या, लक्सर में हिस्ट्रीशीटर की पुलिस हिरासत में हत्या,भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयन्ती पर दो पक्षों में हुए संघर्ष एवं गोलीबारी की घटना,
ऋषिकेश, दून और विकासनगर में तीन लड़कियों की हत्या, हरिद्वार में जमीनी विवाद में सरेआम लाठियां चलना आदि आदि।
इन सभी आपराधिक वारदातों के बाद सीएम धामी ने दो फरवरी की बैठक में अपराधियों पर शिकंजा कसने की ताकीद की। और अगले दिन पुरानी व ताजी आपराधिक घटनाओं से जुड़े तीन एसआई निलंबित कर दिए गए।
दून के व्यस्तम पलटन बाजार के निकट दो फरवरी को सुबह सुबह 23 वर्षीय लड़की की धारदार हथियार से हत्या हो जाती है।
पूर्व में लड़की के परिजन समीप की पुलिस चौकी में अभियुक्त आकाश से खतरे के बाबत तहरीर देते हैं। लेकिन पुलिस आकाश को नहीं पकड़ पाती। हत्या के बाद आकाश को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता है।
कोटद्वार में बाबा नाम की दुकान के विवाद से शहर की फिजां खराब हुई।
मामले को हिन्दू-मुस्लिम का रंग देने के लिए बाहर से प्रदर्शनकारी कोटद्वार पहुंचे। जबकि उसी दिन सीएम धामी और स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी कोटद्वार में एक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे।
कोटद्वार पुलिस बाहर से आए इन प्रदर्शनकारियों को संभाल नहीं पाई। कानून व्यवस्था के सवाल पर कांग्रेस समेत सभो विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला हुआ है।
मामले के राजनीतिक मोड़ लेते ही डीजीपी दीपम सेठ ने जनपद देहरादून के ऋषिकेश में एक महिला की गोली मारकर हत्या करने की घटना पर लापरवाही बरतने पर एम्स चौकी प्रभारी SI साहिल वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है।
दो फरवरी को कोतवाली नगर, देहरादून में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही परिलक्षित होने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी SI प्रद्युम्न नेगी को भी निलम्बित किया गया है।
जनपद हरिद्वार के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयन्ती पर दो पक्षों में हुए संघर्ष एवं गोलीबारी की घटना में गंभीर लापरवाही पर हल्का प्रभारी चुड़ियाला SI सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है।
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संवेदनशीलता के दृष्टिगत दोनों प्रकरणों की जांच एसपी अपराध विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गयी है। घटना में अन्य कर्मियों द्वारा शिथिलता बरते जाने की सात दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया है।
भगवानपुर प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक क्राइम, हरिद्वार जितेन्द्र मेहरा को सौंपी गयी है। साथ ही घटना में अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा लापरवाही बरते जाने की 07 दिवस के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया है।
इधऱ, सीएम धामी ने अभियोजन व्यवस्था परसख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आपराधिक घटनाओं के बाद सीएम व डीजीपी स्तर की बैठकों के बाद निलंबन व जांच की कार्रवाई सामने आई है। लेकिन हालिया बैठकों में आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को सीएम की कड़े शब्दों में दी गयी ताकीद के भी कई मायने निकाले जा रहे है।
दो सप्ताह पूर्व सीएम ने आईएएस अधिकारियों को याद दिलाया था कि उन्होंने साल भर पहले कहा था कि अपनी पहली तैनाती स्थल का अवश्य निरीक्षण करें। लेकिन कोई नहीं गया।
निर्देशों को हल्के में लेने के बाद सीएम ने कुर्सी की सीमित अवधि की अंकगणित का उल्लेख कर भी कई सवाल एक साथ खड़े कर दिए थे।
चुनावी साल में उत्तराखंड की नौकरशाही को नसीहत देने के बाद सीएम ने कई तीर एक साथ साधने की कोशिश की ।
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