9 दिन अंधेरी सुरंग में जिंदगी और मौत के बीच जंग… ‘मंत्र जपते रहा’, फिर लौटी सांसें
त्रिशूली-3A टनल से 10वें दिन दो मजदूर जिंदा निकले, संजय साह ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी; बोले—पहले दूसरों को बचाने में अपना समय निकल गया
काठमांडू/दिल्ली।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग से 9 दिन तक फंसे रहने के बाद दो मजदूरों का जीवित बाहर निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। शुक्रवार को सुरंग से संजय साह और कबीर महर्जन को सकुशल बाहर निकाला गया। दोनों को उपचार के लिए काठमांडू लाया गया है।
नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र कान्तिपुर और द काठमांडू पोस्ट ने दोनों के जीवित बचने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, सप्तरी निवासी संजय साह, जो परियोजना में मैकेनिकल फोरमैन के रूप में कार्यरत थे, हादसे के समय कंट्रोल रूम में मौजूद थे।
‘सबको भागने को कहा, लेकिन मेरा समय निकल गया’
संजय साह ने नेपाली सेना की मेडिकल टीम को बताया कि हादसे के बाद उन्होंने सबसे पहले वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरों को बाहर निकालने की कोशिश में उनका अपना समय निकल गया और वह सुरंग से बाहर नहीं निकल सके।
उन्होंने कहा कि उनका दायित्व सभी की जान बचाना था। इसी कोशिश में वह खुद सुरंग के भीतर फंस गए।
अंधेरे में सहारा बना मंत्र जाप
सबसे भावुक कर देने वाली बात संजय साह ने अपने जीवित बचने के अनुभव के बारे में बताई। कान्तिपुर की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि सुरंग के भीतर फंसे रहने के दौरान वह ‘महामंत्र’ का जाप करते रहे।
अंधेरी सुरंग, बाढ़ का खतरा, बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं और लगातार बढ़ती अनिश्चितता के बीच मंत्र जाप उनके लिए मानसिक सहारा बना रहा।
‘मेरे आसपास 3-4 और लोग थे’—बचाव के बाद बढ़ी उम्मीद
संजय साह ने बचाव दल को यह भी बताया कि सुरंग के भीतर उनके आसपास 3-4 अन्य लोगों से बातचीत या आवाज के माध्यम से संपर्क हुआ था। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि सुरंग के और अंदर, विशेषकर पावरहाउस की ओर, अन्य लोग फंसे हो सकते हैं।
इसी बीच बचाव दल को सुरंग के अंदर से लोगों के बोलने की आवाज सुनाई देने की सूचना भी मिली थी। इससे लापता लोगों के परिजनों में उम्मीद जगी और बचाव अभियान तेज किया गया।
दसवें दिन दो जिंदगियां लौटीं
कान्तिपुर की लाइव कवरेज के मुताबिक शुक्रवार सुबह तक त्रिशूली-3A सुरंग से दो लोगों को जीवित बाहर निकाला जा चुका था—संजय साह और कबीर महर्जन। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद काठमांडू स्थित सैनिक अस्पताल ले जाया गया।
संजय साह का 9 दिन तक सुरंग में जीवित रहना और फिर यह बताना कि वह भीतर मंत्र जाप करते रहे, इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक असाधारण कहानी बन गया है।
नेपाल के इस बचाव अभियान ने एक बार फिर साबित किया है कि आपदा की सबसे अंधेरी घड़ी में भी उम्मीद की एक छोटी-सी रोशनी जिंदगी को बचाए रखने की ताकत दे सकती है।
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