अब तक 408 जनसेवा शिविर, 3.30 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी
देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत प्रशासन ने आम नागरिकों तक सीधी पहुंच बनाते हुए सुशासन की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अभियान सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तविक रूप से जन-केन्द्रित बना रहा है।
प्रदेश में त्वरित सेवा-प्रदान, जनसमस्याओं के समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही का यह कार्यक्रम एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।
408 जनसेवा शिविर, सभी 13 जनपदों में आयोजन
20 जनवरी तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। केवल आज के दिन 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया है।
3.30 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी
इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने प्रतिभाग किया है, जिनमें आज 7,876 नागरिकों की सीधी भागीदारी दर्ज की गई। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल को जनता का व्यापक विश्वास और समर्थन प्राप्त हो रहा है।
शिकायतों का त्वरित निस्तारण
शिविरों के माध्यम से अब तक कुल 33,529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है।
केवल आज ही:
783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त
502 मामलों का समाधान मौके पर या संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित
यह त्वरित निस्तारण सरकार की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही को दर्शाता है।
सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए अब तक 43,975 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,79,169 नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो चुके हैं, जिनमें आज 3,911 नए लाभार्थी जुड़े। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर जनता के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं।
हर जिले में समान उत्साह
जनपदवार आंकड़ों के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित सभी पर्वतीय और मैदानी जिलों में इस अभियान को समान उत्साह के साथ अपनाया गया है। शिविरों में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह पहल जनता की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनती और समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः मजबूत होता है।
सुशासन की नई कार्यसंस्कृति
उत्तराखंड सरकार का यह अभियान राज्य में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आने वाले समय में और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा तथा उत्तराखंड को जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
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