उत्तराखंड के कोटद्वार से शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लगभग 40 साल बाद एक शिक्षक की नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ है। यह मामला 2023 में शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक नफीस अहमद से जुड़ा है।
मामला पौड़ी जिले के कोटद्वार स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालक नगर क्षेत्र का है। जांच में सामने आया कि वर्ष 1985 में नियुक्ति के समय नफीस अहमद की उम्र 18 वर्ष से कम थी।
अभिलेखों के अनुसार उनकी आयु लगभग 17 वर्ष 7 माह 11 दिन (या अन्य रिकॉर्ड में 17 वर्ष 11 माह 11 दिन) पाई गई, जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के अनुसार न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है।
इस पूरे मामले की शिकायत पार्षद विपिन डोबरियाल ने की थी।
इसके बाद विकासखंड दुगड्डा में उप शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच रिपोर्ट 12 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की गई, जिसमें नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) पौड़ी गढ़वाल ने अपनी रिपोर्ट देहरादून में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कंचन देवराड़ी को भेज दी है और आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश मांगे हैं।
इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि संबंधित शिक्षक को वर्षों की सेवा के दौरान सम्मान और पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
अब इस मामले में अंतिम निर्णय प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय स्तर पर लिया जाएगा। पूरे प्रदेश में इस प्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजरें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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