नई दिल्ली। काली मिर्च भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख मसाला है। इसकी कीमत अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण इसमें मिलावट की आशंका भी बनी रहती है। साबुत काली मिर्च में पपीते के बीज मिलाए जा सकते हैं, जो आकार और रंग में पहली नजर में काली मिर्च जैसे दिखाई दे सकते हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई आसान घरेलू परीक्षण बताए हैं। FSSAI के अनुसार काली मिर्च में पपीते के बीज की मिलावट को कुछ आसान तरीकों से पहचाना जा सकता है।
असली काली मिर्च आमतौर पर भूरे से गहरे काले रंग की होती है और इसकी सतह झुर्रीदार व सिकुड़ी हुई दिखाई देती है। इसमें काली मिर्च की खास तेज खुशबू और तीखा स्वाद भी होता है।
इसके विपरीत, पपीते के बीज अपेक्षाकृत चिकने और अंडाकार होते हैं। इनका रंग हरे-भूरे से लेकर काले-भूरे तक हो सकता है। यही समानता मिलावट की पहचान को मुश्किल बना सकती है।
FSSAI के DART परीक्षण के मुताबिक, थोड़ी मात्रा में काली मिर्च को एक गिलास पानी में डालकर देखा जा सकता है। शुद्ध काली मिर्च नीचे बैठ जाती है, जबकि पपीते के बीज पानी की सतह पर तैर सकते हैं।
हालांकि, यह एक शुरुआती घरेलू जांच है। किसी खाद्य पदार्थ की मिलावट की निश्चित पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण अधिक विश्वसनीय होता है।
काली मिर्च के कुछ दानों को सफेद कागज या प्लेट पर फैलाकर अच्छी रोशनी में ध्यान से देखें। FSSAI के अनुसार असली काली मिर्च की सतह झुर्रीदार होती है, जबकि पपीते के बीज अपेक्षाकृत चिकने और अंडाकार दिखाई दे सकते हैं।
अगर एक ही पैकेट में कुछ दाने आकार, बनावट या रंग में स्पष्ट रूप से अलग नजर आएं, तो उन्हें अलग करके जांचना चाहिए।
FSSAI के विश्लेषण मैनुअल में पपीते के बीज की पहचान के लिए अल्कोहल आधारित परीक्षण भी दिया गया है। इसमें पपीते के बीज तैरते हैं, जबकि परिपक्व काली मिर्च के दाने नीचे बैठते हैं।
इसलिए घर पर पानी वाला टेस्ट केवल शुरुआती संकेत के तौर पर इस्तेमाल करें और किसी गंभीर खाद्य सुरक्षा मामले में प्रयोगशाला जांच को प्राथमिकता दें।
डिस्क्लेमर: घरेलू जांच से केवल मिलावट का शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है। खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या मिलावट की अंतिम पुष्टि के लिए अधिकृत प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी है।
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