देहरादून/नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में समाप्त कर दिया। हालांकि, जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र-युवा आंदोलन जारी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी रात देश के युवाओं के नाम वीडियो संदेश जारी कर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं, बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के सपनों और भविष्य पर सीधा हमला है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार ईमानदार छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और पेपर माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उन युवाओं का विश्वास बनाए रखना है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई महीनों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट और और अधिक कठोर कानूनी प्रावधानों के जरिए यह सुनिश्चित करेगी कि पेपर लीक करने वाले कानून से बच न सकें।
उन्होंने संकेत दिया कि पेपर लीक मामलों में सजा और कड़ी करने संबंधी प्रस्ताव पर जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल विचार करेगा और उसके बाद इसे संसद में लाया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि मेहनत करने वाले छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। कम समय में लाखों अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षाएं आयोजित कर समय पर परिणाम घोषित किए गए।
केंद्र सरकार पहले ही लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 लागू कर चुकी है। इस कानून में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा अपराधों के लिए कठोर सजा, भारी जुर्माने और गैर-जमानती प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई रही है। प्रधानमंत्री के संदेश को सरकार की ओर से छात्रों की चिंताओं को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा कि युवाओं के भविष्य की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनके सपनों से खिलवाड़ करने वालों को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना 26 दिन पुराना अनशन समाप्त किया। बताया गया कि लंबी बातचीत और संभावित तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। अनशन समाप्त होने के बाद उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन भी दिया गया है।
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद जंतर-मंतर पर छात्र-युवा आंदोलन जारी है। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि अब यह केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं, बल्कि परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
केंद्र सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसे आंदोलन के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त हो चुका है, लेकिन जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन अपनी मांगों के साथ लगातार जारी है।
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