अक्सर माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने संकेत दिया है कि केवल बच्चों का मोबाइल इस्तेमाल ही नहीं, बल्कि माता-पिता की फोन पर बिताई जाने वाली लंबी अवधि भी बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब माता-पिता बार-बार मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चे खुद को नजरअंदाज महसूस कर सकते हैं, जिससे उनके व्यवहार और भावनात्मक जुड़ाव पर प्रभाव पड़ता है।
शोध के अनुसार, यदि माता-पिता बातचीत, भोजन या खेल के समय भी लगातार फोन का उपयोग करते हैं, तो बच्चों में असुरक्षा की भावना, चिड़चिड़ापन और ध्यान आकर्षित करने वाला व्यवहार बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा माहौल रहने पर बच्चे भी स्क्रीन की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं और परिवार के साथ उनका संवाद कम हो सकता है।
विशेषज्ञ इस स्थिति को 'टेक्नोफेरेंस' कहते हैं, यानी जब डिजिटल डिवाइस माता-पिता और बच्चों के बीच होने वाले सामान्य संवाद में बाधा बन जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में माता-पिता का समय और भावनात्मक जुड़ाव उनके मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से सबसे अधिक सीखते हैं। यदि अभिभावक जिम्मेदारी के साथ मोबाइल का उपयोग करेंगे, तो बच्चों में भी डिजिटल उपकरणों के प्रति संतुलित और स्वस्थ आदतें विकसित होने की संभावना बढ़ेगी। इसलिए बच्चों के स्क्रीन टाइम के साथ-साथ अपने मोबाइल उपयोग पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है।
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