ई दिल्ली। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बेरोजगार युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY 2.0) के तहत देशभर में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम को गति दी है। अक्टूबर 2026 से विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 70 हजार ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण बैच शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य गरीब ग्रामीण परिवारों के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल सिखाकर उन्हें नौकरी के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की 25 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, देश के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 70 हजार युवाओं के प्रशिक्षण के लिए 2,015 बैच शुरू करने की तैयारी की गई है।
इसके तहत 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए प्रशिक्षण संस्थाओं को लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 से 2028 तक सभी 31 भाग लेने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 9 लाख से अधिक प्रशिक्षण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
DDU-GKY 2.0 के अंतर्गत युवाओं को उनकी योग्यता और रोजगार की मांग के अनुसार अलग-अलग व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण की अवधि 3 महीने से लेकर 12 महीने तक हो सकती है। इसमें युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी तकनीकी और व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे।
इस योजना की खास बात यह है कि प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। यानी युवाओं को केवल कौशल सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें नौकरी के अवसरों से जोड़ना भी इसका उद्देश्य है।
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से गरीब ग्रामीण परिवारों के पात्र युवाओं को दिया जाता है।
आवेदन और चयन के दौरान निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाता है:
योजना के तहत प्रशिक्षण और उपलब्ध कोर्स की जानकारी प्राप्त करने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट: https://kaushal.rural.gov.in/
इसके अलावा युवा अपने जिले के ग्रामीण विकास विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन या संबंधित प्रशिक्षण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
ध्यान दें कि प्रशिक्षण में प्रवेश और रोजगार की उपलब्धता निर्धारित पात्रता, चयन प्रक्रिया और संबंधित पाठ्यक्रम पर निर्भर करेगी। योजना में प्रशिक्षण लेने मात्र से सरकारी नौकरी की गारंटी नहीं मिलती।
केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित करना और उन्हें निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इससे युवाओं को अपने कौशल के आधार पर रोजगार प्राप्त करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है।
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