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क्या कलयुग के अंत के संकेत मिल रहे हैं? जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी 'भविष्यमालिका' की भविष्यवाणियां फिर चर्चा में

ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी प्राचीन धार्मिक पुस्तक 'भविष्यमालिका' एक बार फिर चर्चा में है। करीब 500 वर्ष पहले संत अच्युतानंद दास द्वारा लिखी गई मानी जाने वाली इस पुस्तक में कलयुग के अंतिम समय और जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कई संकेतों का उल्लेख मिलता है। हाल के दिनों में इन भविष्यवाणियों को लेकर सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हुई है।

क्या है 'भविष्यमालिका'?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'भविष्यमालिका' में भविष्य में होने वाली अनेक घटनाओं का वर्णन किया गया है। इसमें विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी मंदिर, कलियुग के अंतिम चरण और भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़े संकेतों का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन भविष्यवाणियों की स्वतंत्र वैज्ञानिक या ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

किन भविष्यवाणियों की हो रही चर्चा?

भविष्यमालिका से जुड़ी चर्चाओं में जिन संकेतों का उल्लेख किया जाता है, उनमें प्रमुख हैं—

  • मंदिर की परंपराओं में व्यवधान और भगवान जगन्नाथ के सम्मान में कमी।
  • मंदिर से पत्थरों के गिरने की घटनाएं।
  • मंदिर परिसर के पवित्र कल्पवृक्ष के क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख।
  • मंदिर के शिखर पर लगे ध्वज से जुड़ी असामान्य घटनाएं।
  • सुदर्शन चक्र से संबंधित संकेत।
  • मंदिर के ध्वज में आग लगने जैसी घटनाएं।
  • मंदिर के शिखर पर गिद्ध के बैठने को अशुभ संकेत माना जाना।
  • रक्त वर्षा जैसी रहस्यमयी घटनाओं का उल्लेख।

इन घटनाओं को कुछ लोग कलयुग के अंत के संकेतों से जोड़ते हैं, जबकि इनके संबंध में कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

धार्मिक ग्रंथों और भविष्यवाणियों को लेकर लोगों की अपनी-अपनी आस्था और मान्यताएं होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी भविष्यवाणियों को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। किसी भी घटना को केवल भविष्यवाणी का प्रमाण मानने से पहले उसके ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पक्षों पर भी विचार करना आवश्यक है।

कल्कि अवतार का भी मिलता है उल्लेख

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि अवतार धारण करेंगे और उसके बाद सतयुग का आरंभ होगा। भविष्यमालिका की चर्चाओं में इस मान्यता का भी उल्लेख किया जाता है, हालांकि इसे आस्था का विषय माना जाता है

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