ऋषिकेश: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र बताते हुए कहा कि इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण दीक्षांत समारोह की गरिमा को और बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल वर्षों की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से अपने पेशेवर जीवन में समर्पण और उद्देश्य के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लचीलापन, नवाचार और दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि देश में 140 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई।
उन्होंने भारत की “वैक्सीन मैत्री” पहल की भी सराहना की, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को दर्शाती है और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देशभर में, खासकर वंचित क्षेत्रों में, नए एम्स संस्थानों की स्थापना से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है।
एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान चिकित्सा सेवा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर आपातकालीन सेवाओं और ड्रोन के माध्यम से दवा वितरण जैसी पहलों को स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण नवाचार बताया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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