देहरादून, 13 जून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में आयोजित 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि IMA में नौ महिला कैडेटों का शामिल होना अकादमी के इतिहास का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो महिला नेतृत्व आधारित विकास का प्रेरणादायक उदाहरण है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, "नौ महिला कैडेटों को देखकर मुझे विशेष खुशी हो रही है। यह IMA के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह केवल भारत की रक्षा सेनाओं के इतिहास में ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व वाले विकास का भी प्रेरणादायक उदाहरण है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट इस अकादमी से जुड़ेंगी।"
उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान सम्मान, साहस और राष्ट्र सेवा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले अनेक महान सैन्य नेताओं ने इसी अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े सभी लोगों की मैं सराहना करती हूं।"
राष्ट्रपति ने युवा कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा, "मुझे उन अधिकारी कैडेटों को देखकर खुशी हो रही है जो अब अपने सैन्य जीवन की नई यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। उनका साहस और उनकी समझदारी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होगी।"
देहरादून के ऐतिहासिक चेतवुड बिल्डिंग ड्रिल स्क्वायर में आयोजित इस भव्य परेड में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे।
पासिंग आउट परेड के बाद कुल 515 जेंटलमैन और लेडी कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुए। इनमें नौ महिला कैडेट भी शामिल हैं। इसके अलावा 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी प्रशिक्षण पूरा कर अपने-अपने देशों की सेनाओं में शामिल होंगे।
इस वर्ष की पासिंग आउट परेड विशेष महत्व रखती है क्योंकि IMA के 94 वर्षों के इतिहास में पहली बार महिला अधिकारी कैडेटों का एक बैच प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुआ है।
जुलाई 2025 में अकादमी में शामिल हुईं नौ महिला कैडेटों ने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया और इस प्रतिष्ठित परेड में अपने पुरुष साथियों के साथ कदमताल करते हुए हिस्सा लिया। उनकी नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सैन्य नेतृत्व में समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि इंडियन मिलिट्री एकेडमी की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी। स्थापना से लेकर अब तक 65,000 से अधिक कैडेट इस प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें 34 मित्र देशों के कैडेट भी शामिल हैं।
0 Comments